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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 76: दमयन्ती और बाहुककी बातचीत, नलका प्राकटॺ और नल-दमयन्ती-मिलन
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श्लोक 10
श्लोक
3.76.10
पूर्वं दृष्टस्त्वया कश्चिद् धर्मज्ञो नाम बाहुक।
सुप्तामुत्सृज्य विपिने गतो य: पुरुष: स्त्रियम्॥ १०॥
अनुवाद
'बाहुक! क्या तुमने कभी ऐसा धर्मात्मा पुरुष देखा है जो अपनी सोती हुई पत्नी को वन में अकेला छोड़कर चला गया हो?
'Bahuka! Have you ever seen a man of Dharma who left his sleeping wife alone in the forest and went away?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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