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mahabharat 3.75.18: महर्षि बृहदश्व कहते हैं - युधिष्ठिर! दमयन्ती ने धर्मात्मा महाराज नलकी के कर्मों को सुनकर मन में निश्चय किया कि महाराज नल ही आये हैं। वे अपने कर्मों और आचरण से पहचाने गए॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 75: दमयन्तीके आदेशसे केशिनीद्वारा बाहुककी परीक्षा तथा बाहुकका अपने लड़के-लड़कियोंको देखकर उनसे प्रेम करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.75.18 
बृहदश्व उवाच
दमयन्ती तु तच्छ्रुत्वा पुण्यश्लोकस्य चेष्टितम्।
अमन्यत नलं प्राप्तं कर्मचेष्टाभिसूचितम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं - युधिष्ठिर! दमयन्ती ने धर्मात्मा महाराज नलकी के कर्मों को सुनकर मन में निश्चय किया कि महाराज नल ही आये हैं। वे अपने कर्मों और आचरण से पहचाने गए॥18॥
 
Sage Brihadashwa says - Yudhishthira! Damayanti, after listening to the actions of the virtuous Maharaja Nalaki, decided in her mind that it was Maharaja Nal who had come. He was recognized by his actions and actions.॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)