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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.73.5 
परं विस्मयमापन्ना श्रुत्वा नादं महास्वनम्।
नलेन संगृहीतेषु पुरेव नलवाजिषु।
सदृशं रथनिर्घोषं मेने भैमी तथा हया:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
रथ की भयानक ध्वनि सुनकर वह चकित हो गई। जैसे पूर्वकाल में राजा नल जब घोड़ों की देखभाल करते थे, तो उनके रथ की घरघराहट दमयंती और उनके घोड़ों की घरघराहट जैसी ही थी।
 
She was astonished to hear the terrifying sound of the chariot. Just as in the past, when King Nala used to take care of the horses, the rattling sound of his chariot was similar to that of Damayanti and her horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)