Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.73.18: तत्पश्चात् वार्ष्णेय और बाहुक उस उत्तम रथ से उतरे, घोड़ों को सुरक्षित रखा और रथ को एक स्थान पर खड़ा कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 3.73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.73.18 
ततोऽवतीर्य वार्ष्णेयो बाहुकश्च रथोत्तमात्।
हयांस्तानवमुच्याथ स्थापयामास वै रथम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वार्ष्णेय और बाहुक उस उत्तम रथ से उतरे, घोड़ों को सुरक्षित रखा और रथ को एक स्थान पर खड़ा कर दिया।
 
Thereafter Varshneya and Bahuka alighted from that excellent chariot, unharmed the horses and parked the chariot at a place.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)