Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.73.13: मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी भी मजाक में भी, स्वेच्छा से झूठ बोला हो। मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी किसी को हानि पहुँचाई हो, और मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी भी अपनी दी हुई प्रतिज्ञा तोड़ी हो।॥13॥ | mahabharat अध्याय 3.73: ऋतुपर्णका कुण्डिनपुरमें प्रवेश, दमयन्तीका विचार तथा भीमके द्वारा ऋतुपर्णका स्वागत । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न स्मराम्यनृतं किंचिन्न स्मराम्यपकारताम्।
न च पर्युषितं वाक्यं स्वैरेष्वपि कदाचन॥ १३॥
अनुवाद
मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी भी मजाक में भी, स्वेच्छा से झूठ बोला हो। मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी किसी को हानि पहुँचाई हो, और मुझे स्मरण नहीं आता कि मैंने कभी भी अपनी दी हुई प्रतिज्ञा तोड़ी हो।॥13॥
I do not remember ever telling a lie voluntarily, even in jest. I do not remember ever causing harm to anyone, and I also do not remember ever breaking a promise that I had made.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥