श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.72.33 
तमुवाच कलिर्भीतो वेपमान: कृताञ्जलि:।
कोपं संयच्छ नृपते कीर्तिं दास्यामि ते पराम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तब कलियुग भयभीत और काँपता हुआ हाथ जोड़कर उनसे बोला - 'महाराज! क्रोध पर नियंत्रण कीजिए। मैं आपको महान यश दूँगा॥ 33॥
 
Then Kaliyuga became afraid and trembling and said to him with folded hands - 'Maharaj! Control your anger. I will give you great fame.॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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