श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.72.29 
यथोक्तं त्वं गृहाणेदमक्षाणां हृदयं परम्।
निक्षेपो मेऽश्वहृदयं त्वयि तिष्ठतु बाहुक।
एवमुक्त्वा ददौ विद्यामृतुपर्णो नलाय वै॥ २९॥
 
 
अनुवाद
‘बाहुक! तुम मुझसे जुए का रहस्य सीखो और घोड़ों की विद्या को मेरे लिए स्मृति-चिह्न के रूप में अपने पास रखो।’ ऐसा कहकर ऋतुपर्ण ने अपनी विद्या नल को दे दी।
 
'Bahuka! You must learn the secret of gambling from me and keep the science of horses with you as a keepsake for me.' Saying this, Rituparna gave her knowledge to Nala.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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