vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना
»
श्लोक 28
श्लोक
3.72.28
ऋतुपर्णस्ततो राजा बाहुकं कार्यगौरवात्।
हयज्ञानस्य लोभाच्च तं तथेत्यब्रवीद् वच:॥ २८॥
अनुवाद
तब राजा ऋतुपर्ण ने बाहुक को कार्य की गम्भीरता और अश्वविद्या के आकर्षण का आश्वासन देते हुए कहा - "ऐसा ही हो।" ॥28॥
Then King Rituparna, reassuring Bahuka about the seriousness of the task and the lure of the horse-science, said, "So be it." ॥28॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas