श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.72.24 
तत: स विस्मयाविष्टो राजानमिदमब्रवीत्।
गणयित्वा यथोक्तानि तावन्त्येव फलानि तु॥ २४॥
 
 
अनुवाद
गिनने पर उसे उतने ही फल मिले, तब उसने आश्चर्यचकित होकर राजा ऋतुपर्ण से कहा -॥24॥
 
After counting he got the same number of fruits. Then he was astonished and said to King Rituparna -॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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