श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.72.21 
अथाब्रवीद् बाहुकस्तं संख्याय च बिभीतकम्।
ततो विदर्भान् यास्यामि कुरुष्वैवं वचो मम॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर बाहुक बोला, 'मैं बहेड़ा वृक्ष के फल गिनकर विदर्भ चला जाऊंगा। कृपया मेरी बात मानिए।'
 
Hearing this, Bahuka said, 'I will count the fruits of the Baheda tree and then go to Vidarbha. Please accept my words.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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