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श्लोक 3.72.21  |
अथाब्रवीद् बाहुकस्तं संख्याय च बिभीतकम्।
ततो विदर्भान् यास्यामि कुरुष्वैवं वचो मम॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| यह सुनकर बाहुक बोला, 'मैं बहेड़ा वृक्ष के फल गिनकर विदर्भ चला जाऊंगा। कृपया मेरी बात मानिए।' |
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| Hearing this, Bahuka said, 'I will count the fruits of the Baheda tree and then go to Vidarbha. Please accept my words.' |
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