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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 72: ऋतुपर्णके उत्तरीय वस्त्र गिरने और बहेड़ेके वृक्षके फलोंको गिननेके विषयमें नलके साथ ऋतुपर्णकी बातचीत, ऋतुपर्णसे नलको द्यूतविद्याके रहस्यकी प्राप्ति और उनके शरीरसे कलियुगका निकलना
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श्लोक 20
श्लोक
3.72.20
कामं च ते करिष्यामि यन्मां वक्ष्यसि बाहुक।
विदर्भान् यदि यात्वाद्य सूर्यं दर्शयितासि मे॥ २०॥
अनुवाद
'बाहुक! यदि तुम आज विदर्भ पहुँचकर मुझे सूर्य के दर्शन करा सको, तो मैं तुम्हारी जो भी इच्छा कहूँगी, उसे पूर्ण कर दूँगा।'
'Bahuka! If you can make me see the Sun after reaching Vidarbha today, then I will fulfil whatever wish you tell me.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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