Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.71.32: 'उसके शरीर की बेडौलता देखकर मैं यह नहीं जान पाता कि वह नल नहीं है, परन्तु राजा नल के भार की तुलना में वह कुछ दुबला-पतला है। इससे मुझे ऐसा लगता है कि सम्भव है कि वह नल न हो॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.71.32 
भवेन्न मतिभेदो मे गात्रवैरूप्यतां प्रति।
प्रमाणात् परिहीनस्तु भवेदिति मतिर्मम॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'उसके शरीर की बेडौलता देखकर मैं यह नहीं जान पाता कि वह नल नहीं है, परन्तु राजा नल के भार की तुलना में वह कुछ दुबला-पतला है। इससे मुझे ऐसा लगता है कि सम्भव है कि वह नल न हो॥ 32॥
 
'Looking at the shapelessness of his body, I cannot make out that he is not Nala, but he is somewhat thin compared to the weight of King Nala. This makes me think that it is possible that he is not Nala.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)