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mahabharat 3.71.20: राजा ऋतुपर्ण बड़ी जल्दी में रथ पर चढ़े। जैसे ही वे रथ पर चढ़े, सभी उत्तम घोड़े घुटनों के बल ज़मीन पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.71.20 
ततो युक्तं रथं राजा समारोहत् त्वरान्वित:।
अथ पर्यपतन् भूमौ जानुभिस्ते हयोत्तमा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजा ऋतुपर्ण बड़ी जल्दी में रथ पर चढ़े। जैसे ही वे रथ पर चढ़े, सभी उत्तम घोड़े घुटनों के बल ज़मीन पर गिर पड़े।
 
King Rituparna mounted the chariot in great haste. So as soon as he mounted the chariot, the excellent horses fell on the ground on their knees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)