Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.71.18: ऋतुपर्ण ने कहा, "बाहुक! तुम घुड़सवारी की कला में निपुण और निपुण हो। अतः तुम शीघ्र ही उन लोगों को नियुक्त कर लो जिन्हें तुम इस कार्य के लिए योग्य समझते हो।" | mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋतुपर्ण ने कहा, "बाहुक! तुम घुड़सवारी की कला में निपुण और निपुण हो। अतः तुम शीघ्र ही उन लोगों को नियुक्त कर लो जिन्हें तुम इस कार्य के लिए योग्य समझते हो।"
Rituparna said, "Bahuk! You are an expert and proficient in the art of horsemanship. Therefore, you should quickly harness those whom you consider capable of doing this task."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥