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mahabharat 3.71.16: बाहुक बोला - 'हे राजन! ललाट में एक, सिर में दो, पार्श्वों में दो, अधोभागों में दो, वक्षस्थल के दोनों ओर दो-दो और पृष्ठभाग में एक - इस प्रकार कुल बारह मधुमक्खियों को पहचानकर उन घोड़ों को रथ में जोतना चाहिए॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.71.16 
बाहुक उवाच
एको ललाटे द्वौ मूर्ध्नि द्वौ द्वौ पार्श्वोपपार्श्वयो:।
द्वौ द्वौ वक्षसि विज्ञेयौ प्रयाणे चैक एव तु॥ १६॥
 
 
अनुवाद
बाहुक बोला - 'हे राजन! ललाट में एक, सिर में दो, पार्श्वों में दो, अधोभागों में दो, वक्षस्थल के दोनों ओर दो-दो और पृष्ठभाग में एक - इस प्रकार कुल बारह मधुमक्खियों को पहचानकर उन घोड़ों को रथ में जोतना चाहिए॥ 16॥
 
Bahuka said, 'O King! One in the forehead, two in the head, two in the sides, two in the sub-sides, two on both sides of the chest and one in the back - in this way a total of twelve bees should be identified and the horses should be yoked to the chariot.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)