न ह्यदैवकृतं किंचिन्नराणामिह विद्यते।
न च मे बालभावेऽपि किंचित् पापकृतं कृतम्॥ ४०॥
कर्मणा मनसा वाचा यदिदं दु:खमागतम्।
अनुवाद
‘इस संसार में मनुष्यों को ऐसा कोई सुख या दुःख नहीं मिलता जो विधाता ने न दिया हो। मैंने बचपन में भी मन, वाणी या कर्म से ऐसा कोई पाप नहीं किया है जिससे मुझे यह दुःख हुआ हो। ॥40 1/2॥
‘In this world, humans do not get any happiness or sorrow that is not given by the Creator. Even in my childhood, I have not committed any sin by thought, speech or action that would have caused me this sorrow. ॥ 40 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥