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mahabharat 3.64.99: वह पवित्र नदी, जिस पर पक्षी निवास करते थे, कहाँ चली गई? वे फल-फूलों से सुशोभित सुन्दर वृक्ष कहाँ चले गए?॥99॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  3.64.99 
क्व सा पुण्यजला रम्या नदी द्विजनिषेविता।
क्व नु ते ह नगा हृद्या: फलपुष्पोपशोभिता:॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
वह पवित्र नदी, जिस पर पक्षी निवास करते थे, कहाँ चली गई? वे फल-फूलों से सुशोभित सुन्दर वृक्ष कहाँ चले गए?॥99॥
 
‘Where has that holy river, on which the birds were residing, gone? Where have those lovely trees, adorned with fruits and flowers, disappeared?’॥ 99॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)