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mahabharat 3.64.98: (उसने सोचा -) 'क्या मैंने कोई स्वप्न देखा है? यहाँ कैसी विचित्र घटना घटी है? वे सब तपस्वी कहाँ चले गए और वह आश्रममण्डल कहाँ है?'॥98॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  3.64.98 
किं नु स्वप्नो मया दृष्ट: कोऽयं विधिरिहाभवत्।
क्व नु ते तापसा: सर्वे क्व तदाश्रममण्डलम्॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
(उसने सोचा -) 'क्या मैंने कोई स्वप्न देखा है? यहाँ कैसी विचित्र घटना घटी है? वे सब तपस्वी कहाँ चले गए और वह आश्रममण्डल कहाँ है?'॥98॥
 
(He thought -) 'Have I seen a dream? What kind of strange incident has happened here? Where have all those ascetics gone and where is that ashram mandal?'॥98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)