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mahabharat 3.64.96: नल की प्रिय रानी राजकुमारी दमयन्ती से ऐसा कहकर वे सभी तपस्वी अग्निहोत्र और आश्रम सहित अन्तर्धान हो गए ॥96॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  3.64.96 
एवमुक्त्वा नलस्येष्टां महिषीं पार्थिवात्मजाम्।
अन्तर्हितास्तापसास्ते साग्निहोत्राश्रमास्तथा॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
नल की प्रिय रानी राजकुमारी दमयन्ती से ऐसा कहकर वे सभी तपस्वी अग्निहोत्र और आश्रम सहित अन्तर्धान हो गए ॥96॥
 
Saying this to Nala's beloved Queen Princess Damayanti, all the ascetics disappeared along with Agnihotra and the ashram. 96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)