श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 94-95
 
 
श्लोक  3.64.94-95 
विमुक्तं सर्वपापेभ्य: सर्वरत्नसमन्वितम्।
तदेव नगरं श्रेष्ठं प्रशासतमरिंदमम्॥ ९४॥
द्विषतां भयकर्तारं सुहृदां शोकनाशनम्।
पतिं द्रक्ष्यसि कल्याणि कल्याणाभिजनं नृपम्॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारा पति सब प्रकार के पापों से उत्पन्न दुःखों से मुक्त होकर सब प्रकार के रत्नों से युक्त होगा। शत्रुओं का नाश करने वाले राजा नल पुनः उस महान नगर पर राज्य करेंगे। वे शत्रुओं के लिए भय उत्पन्न करने वाले और मित्रों के लिए शोकनाशक होंगे। कल्याणी! इस प्रकार तुम अपने पति को एक उत्तम कुल में उत्पन्न (राजा के सिंहासन पर आसीन) देखोगे।’॥94-95॥
 
‘Your husband will be free from all kinds of sorrows caused by sins and will be blessed with all kinds of gems. King Nala, the destroyer of enemies, will again rule that great city. He will be fearful for the enemies and a destroyer of sorrow for the friends. Kalyani! Thus, you will see your husband born in a virtuous family (established on the throne of a king)’॥ 94-95॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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