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mahabharat 3.64.90: "उस अनमोल पुरुष नल के बिना जीने से क्या लाभ? मैं सोचती हूँ कि अब पति के शोक से पीड़ित होकर मेरा क्या होगा?"॥90॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  3.64.90 
को नु मे जीवितेनार्थस्तमृते पुरुषर्षभम्।
कथं भविष्याम्यद्याहं भर्तृशोकाभिपीडिता॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
"उस अनमोल पुरुष नल के बिना जीने से क्या लाभ? मैं सोचती हूँ कि अब पति के शोक से पीड़ित होकर मेरा क्या होगा?"॥90॥
 
"What is the use of living without that precious man Nala? I wonder what will happen to me now, suffering from the grief of my husband?"॥90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)