Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.64.7-8: उसने अनेक नदियाँ, झीलें, कुएँ, तरह-तरह के हिरण और पक्षी देखे। उसने अनेक भयानक भूत, साँप और राक्षस देखे। उसने अनेक गड्ढे, तालाब और पर्वत शिखर देखे। उसने नदियाँ और अद्भुत झरने देखे। 7-8. | mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसने अनेक नदियाँ, झीलें, कुएँ, तरह-तरह के हिरण और पक्षी देखे। उसने अनेक भयानक भूत, साँप और राक्षस देखे। उसने अनेक गड्ढे, तालाब और पर्वत शिखर देखे। उसने नदियाँ और अद्भुत झरने देखे। 7-8.
He saw many rivers, lakes, wells and various kinds of deer and birds. He saw many terrifying ghosts, snakes and demons. He observed many pits, pools and mountain peaks. He saw rivers and wonderful waterfalls. 7-8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥