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mahabharat 3.64.67: महाराज वीरसेन की पुत्रवधू रमणी जो महान तपस्विनी थी, और दमयन्ती ने आश्रम में प्रवेश किया ॥67॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.64.67 
सा विवेशाश्रमपदं वीरसेनसुतप्रिया।
योषिद्रत्नं महाभागा दमयन्ती तपस्विनी॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
महाराज वीरसेन की पुत्रवधू रमणी जो महान तपस्विनी थी, और दमयन्ती ने आश्रम में प्रवेश किया ॥67॥
 
Maharaja Veersen's daughter-in-law, Ramani, a great ascetic, and Damayanti, entered the ashram. 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)