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mahabharat 3.64.62: तथा वह वशिष्ठ, भृगु और अत्रि जैसे नियमपालक, मितव्ययी और शम, श्वास, शौच आदि से युक्त तपस्वियों द्वारा सुशोभित हो रहा था ॥62॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.64.62 
वसिष्ठभृग्वत्रिसमैस्तापसैरुपशोभितम्।
नियतै: संयताहारैर्दमशौचसमन्वितै:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
तथा वह वशिष्ठ, भृगु और अत्रि जैसे नियमपालक, मितव्ययी और शम, श्वास, शौच आदि से युक्त तपस्वियों द्वारा सुशोभित हो रहा था ॥62॥
 
And he was being adorned by ascetics like Vashishtha, Bhrigu and Atri who were rule-abiding, frugal and full of (sham,) breath, toilet etc. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)