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mahabharat 3.64.6: वहाँ दमयन्ती ने सैकड़ों धातुओं से बने हुए अनेक प्रकार के पर्वत, पक्षियों के कलरव से गूंजते हुए अनेक उपवन तथा अद्भुत गुफाएँ देखीं।   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.64.6 
नानाधातुशतैर्नद्धान् विविधानपि चाचलान्।
निकुञ्जान् परिसंघुष्टान् दरीश्चाद्‍भुतदर्शना:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ दमयन्ती ने सैकड़ों धातुओं से बने हुए अनेक प्रकार के पर्वत, पक्षियों के कलरव से गूंजते हुए अनेक उपवन तथा अद्भुत गुफाएँ देखीं।
 
There Damayanti saw various types of mountains composed of hundreds of metals, numerous groves resonant with the chirping of birds and wonderful caves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)