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mahabharat 3.64.42: हे प्रभु! अचल! दिव्य दृष्टि वाले! विख्यात! सबको आश्रय देने वाले परम मंगलमय महीधर! आपको नमस्कार है॥42॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.64.42 
भगवन्नचलश्रेष्ठ दिव्यदर्शन विश्रुत।
शरण्य बहुकल्याण नमस्तेऽस्तु महीधर॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! अचल! दिव्य दृष्टि वाले! विख्यात! सबको आश्रय देने वाले परम मंगलमय महीधर! आपको नमस्कार है॥42॥
 
'Lord! Immovable! Those with divine vision! noted! The most auspicious Mahidhar who gives shelter to all! Greetings to you. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)