Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.64.34: 'मृगेन्द्र! मैं अपने पति की खोज में इस वन में अकेली भटक रही हूँ और दुःख से पीड़ित होकर दुःखी हो रही हूँ। यदि आपने यहाँ कहीं भी नल को देखा हो, तो कृपया मुझे उनका कुशल-क्षेम बताकर आश्वासन दीजिए।॥34॥ | mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पतिमन्वेषतीमेकां कृपणां शोककर्षिताम्।
आश्वासय मृगेन्द्रेह यदि दृष्टस्त्वया नल:॥ ३४॥
अनुवाद
'मृगेन्द्र! मैं अपने पति की खोज में इस वन में अकेली भटक रही हूँ और दुःख से पीड़ित होकर दुःखी हो रही हूँ। यदि आपने यहाँ कहीं भी नल को देखा हो, तो कृपया मुझे उनका कुशल-क्षेम बताकर आश्वासन दीजिए।॥34॥
'Mrigendra! I am wandering alone in this forest in search of my husband and am suffering from grief and am feeling sad. If you have seen Nala anywhere here, then please tell me about his well-being and assure me. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥