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mahabharat 3.64.21: हे शुभ राजन! आप पहले भी कहा करते थे कि मुझे आपके अतिरिक्त कोई अन्य स्त्री प्रिय नहीं है; कृपया अपने उस कथन को सत्य सिद्ध कीजिए।॥21॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.64.21 
न मे त्वदन्या काचिद्धि प्रियास्तीत्यब्रवी: सदा।
तामृतां कुरु कल्याण पुरोक्तां भारतीं नृप॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे शुभ राजन! आप पहले भी कहा करते थे कि मुझे आपके अतिरिक्त कोई अन्य स्त्री प्रिय नहीं है; कृपया अपने उस कथन को सत्य सिद्ध कीजिए।॥21॥
 
O auspicious king! You always used to say earlier that no other woman is dear to me except you; please prove that statement of yours to be true. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)