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mahabharat 3.64.129: यह सम्पूर्ण वन मानवेतर प्राणियों से भरा हुआ है। मैं इसमें हाथी, चीते, भैंसे, सिंह, भालू और हिरण ही देख रहा हूँ॥129॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  3.64.129 
कुञ्जरद्वीपिमहिषशार्दूलर्क्षमृगानपि।
पश्याम्यस्मिन् वने कृत्स्ने ह्यमनुष्यनिषेविते॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
यह सम्पूर्ण वन मानवेतर प्राणियों से भरा हुआ है। मैं इसमें हाथी, चीते, भैंसे, सिंह, भालू और हिरण ही देख रहा हूँ॥129॥
 
‘This entire forest is full of non-human creatures. I have been seeing only elephants, leopards, buffaloes, lions, bears and deer in it.॥ 129॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)