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mahabharat 3.64.11: वह अपने पति के वियोग के दुःख से व्याकुल थी। इसलिए राजकुमारी दमयन्ती उस भयानक वन में प्रवेश करके भी किसी प्राणी से नहीं डरती थी ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.64.11 
नाबिभ्यत् सा नृपसुता भैमी तत्राथ कस्यचित्।
दारुणामटवीं प्राप्य भर्तृव्यसनपीडिता॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह अपने पति के वियोग के दुःख से व्याकुल थी। इसलिए राजकुमारी दमयन्ती उस भयानक वन में प्रवेश करके भी किसी प्राणी से नहीं डरती थी ॥11॥
 
She was distressed by the pain of separation from her husband. Therefore Princess Damayanti was not afraid of any living creature even after entering that dreadful forest. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)