Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.64.107: ‘अशोक वृक्ष! तुम कुछ ऐसा करो कि मैं यहाँ से बिना किसी शोक के चला जाऊँ। अशोक वह है जो शोक का नाश करता है, अतः अशोक! तुम अपना नाम सत्य और सार्थक करो।’॥107॥ | mahabharat अध्याय 3.64: दमयन्तीका विलाप और प्रलाप, तपस्वियोंद्वारा दमयन्तीको आश्वासन तथा उसकी व्यापारियोंके दलसे भेंट । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘अशोक वृक्ष! तुम कुछ ऐसा करो कि मैं यहाँ से बिना किसी शोक के चला जाऊँ। अशोक वह है जो शोक का नाश करता है, अतः अशोक! तुम अपना नाम सत्य और सार्थक करो।’॥107॥
‘Ashok tree! You do something so that I go from here without any sorrow. Ashok is that which destroys sorrow, so Ashok! You make your name true and meaningful.'॥ 107॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥