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mahabharat 3.63.5: मैं आपकी कुशल एवं पतिव्रता पत्नी हूँ। मैंने आपके प्रति कोई अपराध नहीं किया है। यदि मैंने कोई अपराध किया है, तो वह मेरा नहीं, किसी और का है। फिर आप मुझे छोड़कर क्यों जा रहे हैं?॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.63.5 
कथमुत्सृज्य गन्तासि दक्षां भार्यामनुव्रताम्।
विशेषतोऽनपकृते परेणापकृते सति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मैं आपकी कुशल एवं पतिव्रता पत्नी हूँ। मैंने आपके प्रति कोई अपराध नहीं किया है। यदि मैंने कोई अपराध किया है, तो वह मेरा नहीं, किसी और का है। फिर आप मुझे छोड़कर क्यों जा रहे हैं?॥5॥
 
‘I am your skilled and devoted wife. I have not committed any crime against you. If I have committed any crime, then it is someone else, not me. Then why are you leaving me and going away?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)