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ननु नाम महाराज धर्मज्ञ: सत्यवागसि।
कथमुक्त्वा तथा सत्यं सुप्तामुत्सृज्य कानने॥ ४॥
अनुवाद
‘महाराज! आप धर्म के ज्ञाता और सत्यवादी हैं; फिर ऐसी सच्ची प्रतिज्ञा करके आप आज मुझे इस वन में सोता हुआ छोड़कर कैसे चले गए?॥4॥
‘Maharaj! You are a knower of Dharma and a truthful person; then after making such a true promise how did you leave me sleeping in this forest and go away today?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥