Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.63.39: दमयंती के इतना कहते ही व्याध अग्नि से जले हुए वृक्ष के समान निर्जीव होकर भूमि पर गिर पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.63.39 
उक्तमात्रे तु वचने तथा स मृगजीवन:।
व्यसु: पपात मेदिन्यामग्निदग्ध इव द्रुम:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
दमयंती के इतना कहते ही व्याध अग्नि से जले हुए वृक्ष के समान निर्जीव होकर भूमि पर गिर पड़ा।
 
As soon as Damayanti said this, the hunter fell down on the ground lifeless like a tree burnt by fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)