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mahabharat 3.63.35: उसकी दुष्टता को जानकर पतिव्रता पत्नी दमयंती क्रोध और क्रोध से भर गई, मानो वह क्रोध की अग्नि से धधक रही हो।   |   mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.63.35 
दमयन्त्यपि तं दुष्टमुपलभ्य पतिव्रता।
तीव्ररोषसमाविष्टा प्रजज्वालेव मन्युना॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उसकी दुष्टता को जानकर पतिव्रता पत्नी दमयंती क्रोध और क्रोध से भर गई, मानो वह क्रोध की अग्नि से धधक रही हो।
 
Realising his wickedness, Damayanti, the devoted wife, was overcome with rage and anger as if she was blazing with the fire of anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)