Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.63.34: वह उसे अपनी बात मनवाने के लिए मधुर और कोमल वाणी में तरह-तरह के आश्वासन देने लगा। वह शिकारी उस समय काम-पीड़ा से व्याकुल था। सती दमयंती उसके बुरे इरादे समझ गईं।   |   mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.63.34 
तामेवं श्लक्ष्णया वाचा लुब्धको मृदुपूर्वया।
सान्त्वयामास कामार्तस्तदबुध्यत भाविनी॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वह उसे अपनी बात मनवाने के लिए मधुर और कोमल वाणी में तरह-तरह के आश्वासन देने लगा। वह शिकारी उस समय काम-पीड़ा से व्याकुल था। सती दमयंती उसके बुरे इरादे समझ गईं।
 
He started giving her various assurances in a sweet and soft voice to make her agreeable to him. That hunter was suffering from sexual anguish at that time. Sati Damayanti understood his evil intentions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)