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mahabharat 3.63.26: इसी समय एक शिकारी उस घने जंगल में घूम रहा था। दमयंती की करुण पुकार सुनकर वह बड़ी तेजी से वहाँ पहुँचा।   |   mahabharat अध्याय 3.63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 63: दमयन्तीका विलाप तथा अजगर एवं व्याधसे उसके प्राण एवं सतीत्वकी रक्षा तथा दमयन्तीके पातिव्रत्यधर्मके प्रभावसे व्याधका विनाश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.63.26 
तत: कश्चिन्मृगव्याधो विचरन् गहने वने।
आक्रन्दमानां संश्रुत्य जवेनाभिससार ह॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इसी समय एक शिकारी उस घने जंगल में घूम रहा था। दमयंती की करुण पुकार सुनकर वह बड़ी तेजी से वहाँ पहुँचा।
 
At this time a hunter was roaming in that dense forest. Hearing Damayanti's pitiful cries he came there very fast.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)