vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान
»
श्लोक 8
श्लोक
3.62.8
सुप्तायां दमयन्त्यां तु नलो राजा विशाम्पते।
शोकोन्मथितचित्तात्मा न स्म शेते तथा पुरा॥ ८॥
अनुवाद
हे राजन! राजा नल का मन शोक से व्याकुल हो रहा था। दमयन्ती के सो जाने पर भी उन्हें पहले जैसी नींद नहीं आ रही थी।
O King! King Nala's mind was churned with grief. Even after Damayanti fell asleep, he himself could not sleep as before. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×