श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.62.7 
दमयन्त्यपि कल्याणी निद्रयापहृता तत:।
सहसा दु:खमासाद्य सुकुमारी तपस्विनी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
कोमल, तपस्वी और शुभ्र दमयन्ती भी सहसा शोक में पड़ गई। वहाँ पहुँचकर उसे भी निद्रा आ गई॥7॥
 
The tender, ascetic and auspicious Damayanti also suddenly fell into sorrow. On reaching there, sleep overtook her too. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)