श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.62.12 
मयि नि:संशयं दु:खमियं प्राप्स्यत्यनुव्रता।
उत्सर्गे संशय: स्यात् तु विन्देतापि सुखं क्वचित्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह पतिव्रता स्त्री मेरे साथ रहने पर अवश्य ही दुःख ही भोगेगी। यद्यपि मैं इसे त्याग दूँ तो इसमें संदेह रहेगा, फिर भी सम्भव है कि किसी दिन इसे सुख मिल जाए।॥12॥
 
‘This faithful wife will surely suffer only misery if she stays with me. Though there will be a doubt if I abandon her, yet it is possible that she may find happiness someday.'॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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