Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.6.7: महाराज धृतराष्ट्र विदुर की स्मृति से मोहित हो गए और पश्चाताप से दुःखी हो गए तथा भ्रातृ-स्नेह से पुनः संजय से इस प्रकार बोले-॥7॥ | mahabharat अध्याय 3.6: धृतराष्ट्रका संजयको भेजकर विदुरको वनसे बुलवाना और उनसे क्षमा-प्रार्थना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पश्चात्तापाभिसंतप्तो विदुरस्मारमोहित:।
भ्रातृस्नेहादिदं राजा संजयं वाक्यमब्रवीत्॥ ७॥
अनुवाद
महाराज धृतराष्ट्र विदुर की स्मृति से मोहित हो गए और पश्चाताप से दुःखी हो गए तथा भ्रातृ-स्नेह से पुनः संजय से इस प्रकार बोले-॥7॥
Maharaja Dhritarashtra was fascinated by the memory of Vidur and became sad with remorse and out of brotherly affection he again spoke to Sanjaya thus -॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥