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mahabharat 3.59.14: यह सुनकर दमयन्ती शोक से दुर्बल हो गई, शोक से अचेत हो गई और आँसू बहाती हुई रुँधे हुए स्वर में निषधराज से बोली-॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.59.14 
तत: सा बाष्पकलया वाचा दु:खेन कर्शिता।
उवाच नैषधं भैमी शोकोपहतचेतना॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर दमयन्ती शोक से दुर्बल हो गई, शोक से अचेत हो गई और आँसू बहाती हुई रुँधे हुए स्वर में निषधराज से बोली-॥14॥
 
On hearing this, Damayanti, weakened by grief, became unconscious with sorrow and shedding tears, said in choked voice to the King of Nishadha -॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)