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mahabharat 3.57.29: हे भारत! वहाँ देवता और ऋषिगण उनकी स्तुति करने लगे। सभी आश्चर्यचकित होकर राजा नल की प्रशंसा करने लगे और उनके सौभाग्य की सराहना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.57.29 
देवैर्महर्षिभिस्तत्र साधु साध्विति भारत।
विस्मितैरीरित: शब्द: प्रशंसद्भिर्नलं नृपम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! वहाँ देवता और ऋषिगण उनकी स्तुति करने लगे। सभी आश्चर्यचकित होकर राजा नल की प्रशंसा करने लगे और उनके सौभाग्य की सराहना करने लगे।
 
Bharat! The gods and sages started praising him there. Everyone was amazed and praised King Nala and appreciated his good fortune.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)