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mahabharat 3.55.4-5: 'मैं इन्द्र हूँ, वही अग्निदेव हैं, वही जल के स्वामी वरुण हैं और वही प्राणियों के शरीर का नाश करने वाले यमराज हैं। तुम दमयन्ती के पास जाकर उसे हमारे आगमन का समाचार दो और कहो - महेन्द्र आदि लोकपाल तुम्हारे दर्शनार्थ आ रहे हैं। 4-5॥   |   mahabharat अध्याय 3.55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  3.55.4-5 
अहमिन्द्रोऽयमग्निश्च तथैवायमपां पति:।
शरीरान्तकरो नॄणां यमोऽयमपि पार्थिव॥ ४॥
त्वं वै समागतानस्मान् दमयन्त्यै निवेदय।
लोकपाला महेन्द्राद्या: समायान्ति दिदृक्षव:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'मैं इन्द्र हूँ, वही अग्निदेव हैं, वही जल के स्वामी वरुण हैं और वही प्राणियों के शरीर का नाश करने वाले यमराज हैं। तुम दमयन्ती के पास जाकर उसे हमारे आगमन का समाचार दो और कहो - महेन्द्र आदि लोकपाल तुम्हारे दर्शनार्थ आ रहे हैं। 4-5॥
 
'I am Indra, he is the fire god, he is Varun, the lord of water and he is Yamraj, the one who destroys the bodies of living beings. You go to Damayanti and inform her about our arrival and say – Mahendra and other Lokpal are coming to see you. 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)