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mahabharat 3.55.25: हे भद्रे! इसीलिए महान देवताओं ने मुझे यहाँ भेजा है। हे शुभ! इसे सुनकर अपनी इच्छानुसार निर्णय करो।   |   mahabharat अध्याय 3.55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.55.25 
एतदर्थमहं भद्रे प्रेषित: सुरसत्तमै:।
एतच्छ्रुत्वा शुभे बुद्धिं प्रकुरुष्व यथेच्छसि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे भद्रे! इसीलिए महान देवताओं ने मुझे यहाँ भेजा है। हे शुभ! इसे सुनकर अपनी इच्छानुसार निर्णय करो।
 
O Bhadre! That is why the great gods have sent me here. O Shubh! After listening to this, decide as per your wish. 25.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि नलस्य देवदौत्ये पञ्चपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें नलके देवदूत बनकर दमयन्तीके पास जानेसे सम्बन्ध रखनेवाला पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)