श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.55.24 
तेषामेव प्रभावेण प्रविष्टोऽहमलक्षित:।
प्रविशन्तं न मां कश्चिदपश्यन्नाप्यवारयत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उन देवताओं के प्रभाव से मैं इस महल में प्रवेश कर गया हूँ और मुझे कोई देख नहीं पाया है। अन्दर प्रवेश करते समय न तो मुझे किसी ने देखा है और न ही किसी ने मुझे रोका है॥ 24॥
 
Due to the influence of those gods, I have entered this palace and no one has been able to see me. While entering inside, no one has seen me nor has anyone stopped me.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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