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श्लोक 3.55.24  |
तेषामेव प्रभावेण प्रविष्टोऽहमलक्षित:।
प्रविशन्तं न मां कश्चिदपश्यन्नाप्यवारयत्॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| उन देवताओं के प्रभाव से मैं इस महल में प्रवेश कर गया हूँ और मुझे कोई देख नहीं पाया है। अन्दर प्रवेश करते समय न तो मुझे किसी ने देखा है और न ही किसी ने मुझे रोका है॥ 24॥ |
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| Due to the influence of those gods, I have entered this palace and no one has been able to see me. While entering inside, no one has seen me nor has anyone stopped me.॥ 24॥ |
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