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mahabharat 3.55.16: वे सब बहुत प्रसन्न और आश्चर्यचकित होकर राजा नल की सुन्दरता की प्रशंसा करने लगे। राजा नल ने उनसे कुछ नहीं कहा, परन्तु मन ही मन उनका बहुत आदर किया।   |   mahabharat अध्याय 3.55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 55: नलका दूत बनकर राजमहलमें जाना और दमयन्तीको देवताओंका संदेश सुनाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.55.16 
प्रशशंसुश्च सुप्रीता नलं ता विस्मयान्विता:।
न चैनमभ्यभाषन्त मनोभिस्त्वभ्यपूजयन्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वे सब बहुत प्रसन्न और आश्चर्यचकित होकर राजा नल की सुन्दरता की प्रशंसा करने लगे। राजा नल ने उनसे कुछ नहीं कहा, परन्तु मन ही मन उनका बहुत आदर किया।
 
Being very happy and surprised, they all praised the beauty of King Nala. He did not talk to them; but respected them very much in his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)