Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.52.30: 'यदि वह पापी किसी प्रकार समझ ले कि हमने वनवास की अवधि पूरी कर ली है, तो हमें उस अवस्था में देखकर वह पुनः तुम्हें जुआ खेलने के लिए बुलाएगा॥30॥ | mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यस्मानभिगच्छेत पाप: स हि कथंचन।
अज्ञातचर्यामुत्तीर्णान् दृष्ट्वा च पुनराह्वयेत्॥ ३०॥
अनुवाद
'यदि वह पापी किसी प्रकार समझ ले कि हमने वनवास की अवधि पूरी कर ली है, तो हमें उस अवस्था में देखकर वह पुनः तुम्हें जुआ खेलने के लिए बुलाएगा॥30॥
'If that sinner somehow understands that we have completed the period of exile, then on seeing us in that condition he will once again call you for gambling.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥