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mahabharat 3.52.21: 'राजा! यदि ऐसा हो तो आप हमारे धर्मात्मा राजा, अविवेकी और दीर्घबुद्धि वाले नहीं माने जायेंगे। 21॥   |   mahabharat अध्याय 3.52: भीमसेन-युधिष्ठिर-संवाद, बृहदश्वका आगमन तथा युधिष्ठिरके पूछनेपर बृहदश्वके द्वारा नलोपाख्यानकी प्रस्तावना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.52.21 
एवमेतद् भवेद् राजन् यदि राजा न बालिश:।
अस्माकं दीर्घसूत्र: स्याद् भवान् धर्मपरायण:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'राजा! यदि ऐसा हो तो आप हमारे धर्मात्मा राजा, अविवेकी और दीर्घबुद्धि वाले नहीं माने जायेंगे। 21॥
 
'King! If this happens then you, our pious king, will not be considered unreasonable and long-minded. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)