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mahabharat 3.51.6: उनके अस्त्र-शस्त्र प्रबल हैं। वे दूर तक निशाना साध सकते हैं। वे युद्ध के लिए भी दृढ़ हैं। वे दोनों अपने अस्त्र-शस्त्र बड़ी तेजी से चलाते हैं। उनका क्रोध भी बड़ा प्रबल है। वे सदैव परिश्रमी और शीघ्रगामी होते हैं॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 51: संजयका धृतराष्ट्रके प्रति श्रीकृष्णादिके द्वारा की हुई दुर्योधनादिके वधकी प्रतिज्ञाका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.51.6 
दृढायुधौ दूरपातौ युद्धे च कृतनिश्चयौ।
शीघ्रहस्तौ दृढक्रोधौ नित्ययुक्तो तरस्विनौ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उनके अस्त्र-शस्त्र प्रबल हैं। वे दूर तक निशाना साध सकते हैं। वे युद्ध के लिए भी दृढ़ हैं। वे दोनों अपने अस्त्र-शस्त्र बड़ी तेजी से चलाते हैं। उनका क्रोध भी बड़ा प्रबल है। वे सदैव परिश्रमी और शीघ्रगामी होते हैं॥6॥
 
‘Their weapons are strong. They can aim at long distances. They are also determined to fight. Both of them move their weapons very quickly. Their anger is also very strong. They are always industrious and very swift.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)